ईपीएफ के मामले में स्थिति बिल्कुल अलग हैं। इसमें रकम नॉमिनी के पास जाती है, वसीयत में बताए गए शख्स के पास नहीं। नियमो के मुताबिक, आप अपने ईपीएफ खाते में परिवार के सदस्य के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को नॉमिनेट नहीं कर सकते, जब तक कि आपका परिवार न हो। परिवार होने पर आपको अपना नॉमिनेशन इसके किसी सदस्य के पक्ष में बदलना होता है। आप परिवार के एक से ज्यादा सदस्यों को भी नॉमिनेट कर ईपीएफ की रकम उनके बीच बांटने का अनुपात बता सकते हैं। इसके लिए एंप्लॉयी प्रॉविडेंट फंड स्कीम, 1952 के सेक्शन 61 को देखें।

कंपनी प्रतिभूतियां (शेयर्स)

कंपनीज ऐक्ट के सेक्शन 109ए के मुताबिक, नॉमिनी मूल शेयरहोल्डर की मृत्यु के बाद शेयर्स का कानूनी तौर पर वारिस होता है। अगर शेयरहोल्डर ने किसी अन्य व्यक्ति को अपनी वसीयत में हकदार बनाया है, तो भी नॉमिनी ही शेयर्स का मालिक होगा।

तो दोस्तों ये हमने आपको अलग अलग स्थिति के हिसाब से बताया की किस स्थिति में नॉमिनी मालिक होता है और किस में नहीं |

तो दोस्तों अब बात आती है उस स्थिति की जब आप ये चाहते है की आपकी मृत्यु के बाद आपकी सारी संपत्ति आपके नॉमिनी को ही मिले तो इसके लिए क्या करना चाहिए | दोस्तों आपकी ये चाहत पूरी करने के लिए आपको वसीयत बनानी होगी | वसीयत में बताना होगा की आप अपनी संपत्ति में से किसे क्या देना चाहते है | वसीयत एक सर्वोपरि दस्तावेज़ के तौर पर काम करेगी और अगर आपकी वसीयत वैध साबित हो जाती है तो ये आपके जीवन काल के किसी भी नॉमिनेशन या किसी भी अरेंजमेंट को ओवरराइड कर जाएगी | और दोस्तों वसीयत के प्रावधान तो आपकी उस संपत्ति पर भी लागु होंगे जिसमे आपने नॉमिनेशन नहीं किया |

वो दोस्तों कहते है ना की लम्बी अवधि के लिए सोच और योजना आपकी छोटी अवधि के निर्णय लेने की क्षमता पर ाचा प्रभाव डालती है तो आपके आपनो के लिए आप वसीयत बनाइये और वसीयत और नॉमिनेशन में समानता रखिये जिससे आपकी संपत्ति का बटवारा बिना किसी झंझट के आराम से हो जाये और आपके जाने के बाद आपके कानूनी वारिस को या जिसे आप अपनी संपत्ति देना चाहते है उसे आपकी संपत्ति लेने के लिए कोई कानूनी लड़ाई ना लड़नी पड़े |

तो दोस्तों, अपनी मृत्यु के बाद असेट का हकदार बनाने के लिए आपके किसी व्यक्ति को जरूर नॉमिनेट करना चाहिए। इसके साथ ही आपके पास वसीयत भी होनी चाहिए, जिससे असेट्स आपकी इच्छा के अनुसार बांटे जा सकें।

तो दोस्तों अब आपको लग रहा होगा की जब नॉमिनी मालिक होता ही नहीं तब क्यों कहाँ जाता है की नॉमिनेशन ज़रूर करे.. या नॉमिनेशन क्यों ज़रूरी है?

या फिर नॉमिनेशन का क्या महत्व है ?

दोस्तों नॉमिनेशन होने से आपकी संपत्ति का ट्रांसफर सुविधाजनक हो जाता है और अगर आपका नॉमिनी ही आपका कानूनी वारिस भी है तब तो कोई चिंता ही नहीं | लेकिन अगर नहीं भी है तब भी वो आपके कानूनी वारिसों को संपत्ति आसानी से ट्रांसफर कर पायेगा | क्योकि नॉमिनी को आपकी संपत्ति ट्रांसफर होती है और वो आगे कानूनी वारिस को ट्रांसफर कर देता है लेकिन नॉमिनी बनाते समय आप ध्यान रखिएगा की  शेयर्स और epf के केस में जो नॉमिनी होगा वो ही कानूनन मालिक माना जायेगा |

तो अपनी संपत्ति को सुरक्षित करने के लिए नॉमिनेशन करे और साथ ही साथ वसीयत भी ज़रूर बनाये | ताकि आपके जाने के बाद आपके अपनों को आपकी संपत्ति हासिल करने के लिए कोई कानूनी लड़ाई ना लड़नी पड़े और किसी असुविधा का सामना ना करना पड़े |

दोस्तों उम्मीद करते है की आपको नॉमिनी के बारे में सारी जानकारी मिल गयी होगी और आप समाज गए होंगे की सभी परिस्तिथियो में नॉमिनी आपकी संपत्ति का कानूनी मालिक नहीं होता और अगर आप चाहते है की आपकी मृत्यु के बाद नॉमिनी ही आपकी संपत्ति का मालिक बने तो आपको क्या करना होगा |

तो दोस्तों अगर आपको हमारा लेख पसंद आया तो इसे अपना दोस्तों के साथ भी शेयर करिये और हमे नीच कमेंट करके ज़रूर बताइये की कैसा लगा आपको हमारा ये प्रयास |

धन्यवाद् |

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